पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३६ पञ्चदशी बैठा हुआ पुरुष आसन पर भी बैठा होता है, इसलिये सविकल्प का आधेय जो विकल्प है वह विकल्प का भी आधेय हुआ, तो प्रथम विकल्प और द्वितीय विकल्प दोनों का अभेद होने से अपने में अपने की स्थिति हो गयी और यों आत्माश्रय दोष आगया। इस दोष की निवृत्ति के लिये आधार के विशेषण विकल्प को यदि विकल्पान्तर मानें तो उस पर भी यह प्रश्न हो सकता है कि उस विकल्प का आधार निर्विकल्प है कि सविकल्प है ? प्रथम पक्ष तो असम्भव ही है। द्वितीयपक्ष में द्वितीय विकल्प के आधार का विशेषण विकल्प प्रथम विकल्प है अथवा द्वितीय विकल्प है ? प्रथम पक्ष में अन्योन्याश्रय दोष है क्योंकि, प्रथम विकल्प का आधार द्वितीय विकल्प और द्वितीय का तृतीय और वह तृतीय प्रथम विकल्पस्वरूप है तो अर्थात् यह सिद्ध होगया कि प्रथम विकल्प का आधार द्वितीय विकल्प तथा द्वितीय विक- ल्प का प्रथम विकल्प इसलिये अन्योन्याश्रय दोष है। द्वितीय विकल्प स्वरूप मानें तो आत्माश्रय दोष है। इस दोष की निवृत्ति के लिये तृतीयविकल्प को यदि विकल्पान्तर मानें तो उस पर भी यही प्रश्न हो सकता है कि तृतीय विकल्प का आधार निर्वि- कल्प है अथवा सविकल्प है ? प्रथम पक्ष तो असम्भव ही है। द्वितीय पक्ष में फिर प्रश्न हो सकता है कि चतुर्थ विकल्प प्रथम विकल्पस्वरूप है या विकल्पान्तर है। प्रथम पक्ष में चक्रक दोष है क्योंकि प्रथम विकल्प का आधार द्वितीय विकल्प, द्वितीय का तृतीय, तृतीय का चतुर्थ, चतुर्थ प्रथम स्वरूप है। यों अर्थात् सिद्ध हो गया कि प्रथम का आधार द्वितीय, द्वितीय का तृतीय, तृतीय का प्रथम। इस दोष की निवृत्ति के लिये चतुर्थ विकल्प को यदि विकल्पान्तर मानें तो अनवस्था दोष होगा क्योंकि