पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 505, कुल 726 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मानन्दे आत्मानन्दप्रकरणम् ४८३ प्रधान होता है। उससे भिन्न और दोनों तरह के आत्मा 'शेष' किंवा 'गौण' हो जाते हैं। आत्मा यद्यपि तीन प्रकार का है तो भी पालन में 'पुत्र' 'मुख्यात्मा' होता है। पोषण के समय 'देह' ही 'मुख्यात्मा' माना जाता है। तथा ब्रह्मात्मत्व का अनुसन्धान करते समय 'साक्षी' को ही 'मुख्यात्मा समझा जाता है। जब इनमें से किसी एक को 'मुख्यात्मा' माना जाता है तब उस समय वही एक शेषी किंवा मुख्य होता है। उस समय उससे भिन्न और सबके सब शेष अथवा अमुख्य हो जाते हैं। मुमूर्षो गृहरक्षादौ गौणात्मैवोपयुज्यते । न मुख्यात्मा न मिथ्यात्मा पुत्रः शेषी भवत्यतः॥४४॥ गृहरक्षादि कामों में मुमूर्षु को गौणात्मा का ही उपयोग हो सकता है। मुख्यात्मा या मिथ्यात्मा का नहीं। इस कारण ऐसे कामों में पुत्र ही शेषी होता है। देख लो कि—घर की रक्षा आदि जो काम हैं उनमें पुत्र या भार्या आदि गौणात्माओं का ही उपयोग हो सकता है। क्योंकि वे उस के बाद भी जीवित रहना चाहते हैं। अविकारी होने के कारण मुख्य आत्मा [ जो साक्षी है घर की रक्षा में उस ] का तो कुछ उपयोग ही नहीं हो सकता। मिथ्या आत्मा [जो देह है वह] तो मरने को तैयार बैठा है। उससे भी घर की रक्षा नहीं हो सकती। इस कारण ऐसे काम में पुत्र ही 'शेषी' किंवा 'मुख्यात्मा' हो सकता है। अध्येता वह्निरित्यत्र सन्नप्यग्निर्न गृह्यते । अयोग्यत्वेन, योग्यत्वाद् बटुरेवात्र गृह्यते ॥४५॥