पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 578, कुल 726 में से
संदर्भ में पढ़ें५५६ पञ्चदशी जिन शास्त्रों, जिन अध्यात्मदर्शी गुरुओं, जिन ज्ञानों और जिन आनन्दों के कारण से, आज मुझे यह धन्य अवस्था हाथ लगी है, उन सब को अनेक अनेक बार धन्यवाद है [ वे सब के सब आज मुझे मेरा परम पद देकर समुत्तीर्ण हो गये हैं । उनकी महिमा को गाने के लिये मैं शब्दों को कहां से लाऊँ ?] ब्रह्मानन्दाभिधे ग्रन्थे चतुर्थोऽध्याय ईरितः । विद्यानन्द स्तदुत्पत्तिपर्यन्तोऽभ्यास इष्यताम् ॥६५॥ ब्रह्मानन्द नाम के ग्रन्थ में 'विद्यानन्द' नाम का चतुर्थ अध्याय समाप्त हुआ । इस विद्यानन्द की उत्पत्ति जब तक न हो जाय तभी तक ब्रह्माभ्यास करना आवश्यक होता है । [ इसके उत्पन्न हो जाने पर फिर ब्रह्माभ्यास करना शेष नहीं रह जाता ] इति श्रीमद्विद्यारण्यमुनिविरचितपंचदश्यां ब्रह्मानन्दे विद्यानन्दप्रकरणम्