पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 588, कुल 726 में से
संदर्भ में पढ़ें५६६ पञ्चदशी प्रकाश भासने लग पड़ता है तब फिर यह दीखने वाली त्रिपुटी नहीं रह जाती। यही कारण है कि उस को 'भूमानन्द' कहा जाता है। ब्रह्मानन्दाभिधे ग्रन्थे पंचमोध्याय ईरितः । विषयानन्द एतेन द्वारेणान्तः प्रविश्यताम् ॥३४॥ ब्रह्मानन्द नाम के ग्रन्थ में विषयानन्द नाम का पांचवां अध्याय समाप्त हुआ। मन्दाधिकारी लोग इसी को द्वार बना कर आत्ममन्दिर में घुस बैठें । प्रीयाद्धरिर्हरोऽनेन · ब्रह्मानन्देन सर्वदा । पायाच्च प्राणिनः सर्वान् स्वाश्रिताञ्छुुद्धमानसान्॥३५॥ इस ब्रह्मानन्द नाम की पुस्तक से हरि और हर प्रसन्न हो जांय । [ अपना प्रसन्न रूप साधकों को दिखाने पर उतारू हो जांय ]। शुद्ध मन वाले जितने भी प्राणी उनके आश्रय में पड़े हैं वे उन सब का पालन करें [ उन्हें इस संसार सागर से पार कर दें । ] इति श्रीमद्विद्यारण्यमुनिविरचितपंचदश्यां ब्रह्मानन्दे विषयानन्दः समाप्तः [ पंचदशी समाप्ता ]