भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 591, कुल 726 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 591

ओम् [ १ ] तत्त्वविवेक का संक्षेप जिन को जिस बात की आवश्यकता हो और उसको ग्रहण करने में समर्थ भी हों, तो वे उसके 'अधिकारी' कहाते हैं । जो जिस बात के अधिकारी नहीं होते, वे यदि उस बात को सुनें भी तो वे उसे न समझने के कारण उससे कुछ भी लाभ नहीं उठा सकते । जिनके चित्त रागादि दोषों से रहित हो चुके हों, जिन्हें संसार की सच्ची स्थिति का पूर्ण परिज्ञान हो चुका हो, जिन पर माया का मोहक प्रभाव पड़ना बन्द होगया हो, जिनका ज्ञाननेत्र खुलना चाहता हो, वसन्त ऋतु के आने पर सर्वतः अंकुरित पौधे के समान ज्ञानाङ्कुर जिनके अन्दर से फूट निकलने की तैयारी कर चुका हो, संक्षेप में यों कहो कि जो नित्यानित्य वस्तुओं को पहचान चुके हों, इसी कारण इस लोक और परलोक के भोगों से जिन्होंने मुंह मोड़ लिया हो, जिनकी इन्द्रियाँ भी निगृहीत होगयी हों, जिनके मन के पांव में शम की भारी शंखला पड़ गयी हो, जिनके लिये अब केवल एक मुक्ति का ही दर्वाज़ा खुला रह गया हो, उन लोगों को सरलता से तत्वज्ञान कराने के लिये इस प्रकरण का निर्माण किया गया है, वे ही इसको पढ़ने के अधिकारी हैं । इससे उनको तत्व अर्थात् अनारोपित रूप की पहचान हो जायगी कि वह कौनसा है ?