पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
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१६ पंचदशी बाधा करने को दूसरा प्रमाण कहाँ से आयेगा ? अनुभव से-अपने तजुर्बे से-बड़ा तो कोई प्रमाण ही नहीं होता। इस प्रकार सत् जो अद्वैत है और अनृत जो द्वैत है, इन दोनों को हिलामिला कर जो एक मिश्रण बना लिया गया है, इस मिश्रण को जब सर्वथा अलगा दिया जाय, जब इन दोनों को अलग अलग समझ लिया जाय, तो निर्वाण पद किसी के भी रोके रुक नहीं सकेगा। सारांश यही हुआ कि पंचभूत विवेक करने पर जिस वेदान्त- सिद्ध अद्वैत का ज्ञान होगा, उसकी बाधा अन्तकाल में भी नहीं हो सकेगी और विदेहमुक्ति मिल कर ही रहेगी।