भारतकोश
पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)

पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)

Panchasiddhantika of Acharya Varahamihira with Commentary

आचार्य वराहमिहिर द्वारा

DevanagariHindipublished419 पृष्ठ

पृष्ठ 392, कुल 419 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 392

1 Page blank APPENDIX I INDEX OF VERSES

अंशाशीत्या 9.7 अक्षे क्षिप्तां लेखां 14.3 अक्षोक्षिप्तस्योदृक् 14.25 अणुमात्रदर्शन 15.12 अतिजगत्या 18.81 अधिमासकेषु 1.13 अधिमासकोन 15.24 अध्यर्धशतं 18.14 अनयोर्विश्लेषांशान् 18.41 अनुवक्रि परि गत्वा 18.5 अनुवक्रोऽशीत्या 18.13 अन्याद्ययोः 10.7 अन्यच्च भवेद् भूमेः 13.7 अन्यद्रोमक 15.25 अपमान्तरविक्षेपा 5.5 अपमान्तरसंयुक्ता 5.1 अपमोनयुताक्ष 4.22 अपवृषमिथुना 4.24 अभिमतदेशाक्ष 14.29 अर्केन्दुदृष्टि 15.6 अर्केन्दुभुक्ति 10.5 अर्केन्दुयोगचक्रे 3.20 अर्कोदद्यन्तारांशान् 18.54 अर्धेनालिख्य 8.18 अर्हत्प्रोक्ते 13.8 अलिनि दशघ्नाः 18.49 अवनतिवर्गं 8.16; 9.26 अविचार्यैवं 15.29 अविदितसंस्था 15.2 अविशेषाद् दृक्क्षेपं 9.24 अष्टगुणे दिनराशौ 3.28 अष्टनहत्या 18.80 अष्टादशभिः 18.65, 72 अष्टौ भागा लिप्ता 16.6 असितात् सितात् 13.38 अस्तोदयन्तारांशा 18.54

अस्माकमुदय 15.8 आकरणाद् रवि 18.66 आवन्त्यकः 18.61 आश्लेषार्धादासीत् 3.21

इष्टक्रान्तिज्याघ्न 4.39 इष्टांशद्विगुणोन 4.5 इष्टा नाड्यो द्यु 4.50 इष्टेऽहनि बुद्ध्वा 14.10c इष्टोत्तरगोलाप 4.32

उक्तश्च संहितायां 15.10 उज्जयिनी लङ्कायाः 13.17 उत्तरगोलेऽर्क 4.35 उत्तरमक्षाच्छुद्धं 8.12 उदगयनं मकरादा 3.25 उदगयने पूर्वार्धे 7.3 उदयगुणिता 18.22 उदयनवांशं 18.7 उदयात् प्रभृति च 8.10 उदयो यो लङ्कायां 15.23

ऋक्षं लिप्ताष्टशती 3.16 ऋजुशङ्कु 13.31

एकादशाष्ट 3.2 एकेन्द्रियवसु 18.34 एकैकोंऽशो 13.15 एवं कृते ग्रहान्त 18.58 एवं कृत्वा हन्यात् 4.43 एवं च नवत्यंशैः 13.16 एवं व्यर्काच्चन्द्रा 5.9 एवं स्फुटमध्याख्यं 17.9, एष निशार्धे 16.1

कन्यांशान् षट् 18.2

कन्यायामुत्कृत्या 18.47 कन्यायामृतुकृत 18.47 कमलोद्भवप्रजेशौ 1.24 कर्कटकादिषु भुक्तं 2.9 कर्कटसिंहयो 18.31 कर्किणि दिग्घ्नैः 18.45 कालापेक्षा 3.36 काष्ठघ्न्यार्क 4.53 किन्वन्तरांशहीनौः 6.5 कुम्भाधर्कारं ताम्रं 14.32 कुम्भेऽह्नां विंशत्या 18.52 कृतगुणमृत्तु 2.1 कृतदिग्ग्रहणे 4.38 कृतियोगपदं 10.6 कृत्वा चतुर्भिरुद्यान् 18.37 fn. क्लैवं क्षयवृद्धी 5.10 केन्द्रान्तरज्या 9.13 क्रमशः मध्यः 18.8 क्षेप्याः स्वरेन्दु 16.10

खखरूपाष्टगुण 8.4 खजिनघ्नी क्रान्ति 4.34 खनवनगाः शशि 8.7 खार्काधिकं भवेद् 3.6

गगनमुपैति 13.4 गणितविषयोपलब्ध 14.41 गतमयनादुत्तरतो 12.5 गतिविश्लेषकृति 18.55 गत्यर्धे भगणार्ध 2.5 गवि द्विकृत 18.43 गवि वेदयम 18.43 fn. गुणरसनवका 4.10 गुणशिखिगुणाम्नि 3.17 गुणसलिलपांशु 14.27 गुरुभूतनया 17.14