भारतकोश
पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)

पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)

Panchasiddhantika of Acharya Varahamihira with Commentary

आचार्य वराहमिहिर द्वारा

DevanagariHindipublished419 पृष्ठ

पृष्ठ 393, कुल 419 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 393

368 PAÑCASIDDHĀNTIKĀ गुरूचपलाय 14.28 गोमिथुनतौलिक 18.30 ग्रहणेन्दोः 10.4 घनषोडशहत 2.3 चक्रात् पतितं वक्त्रम् 9.6 चतुराधिकेन शतेन 18.40 चत्वारिंशच्छशि 18.27 चत्वारिंशद्रामा 4.9 चन्द्रच्छेदक 6.13 चन्द्रत्मोव्यास 10.20 चन्द्रादूर्ध्वं बुध 13.39 चन्द्राम्बरान्तर 11.2 चरखण्डपक्षांश 4.27 चरदलकाल 4.31 चरनाडीक्रम 4.51 चित्रार्धाष्टमभागे 14.37 छायाद्वादश 4.45 छायार्कवर्गयोगा 4.52 छायार्को नाडीभिः 4.49 छाया समरेखा 4.55 छायाहरिजाभ्यन्तर 14.6 छेद्यवदर्धकपालं 14.19 छेद्यार्धयष्टि 14.12 जह्यादुदय 18.15 जीवस्य शता 16.2 जीवाध्यर्ध 4.16 ज्ञसितारेज्या 18.60 ज्याविधिना विक्षेपं 9.25 ज्याविधिविक्षेप 18.57 झषवृश्चिका 18.29 तज्ज्या तिर्यग्रेखा 14.11 तज्ज्या स्थितज्य 4.42 [