पञ्चतन्त्रम् (संस्कृत मूल एवं भाषा टीका सहित)
Panchatantram with Sanskrit & Hindi Commentary
पं. विष्णु शर्मा / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
अथ पंचतन्त्रम् ।
भाषाटीकासहितम् ।
ब्रह्मा रुद्रः कुमारो हरिवरुणयमा वह्निरिन्द्रः कुबेर- श्चन्द्रादित्यौ सरस्वत्युदधियुगनगा वायुरुर्वी भुजङ्गाः । सिद्धानद्योऽश्विनौ श्रीर्दितिरदितिसुता मातरश्चाण्डिकाद्या वेदास्तीर्थानि यज्ञा गणवसुमुनयः पान्तु नित्यं ग्रहाश्च ॥१॥
मया ज्वालाप्रसादेन नमस्कृत्य गजाननम् । क्रियते पञ्चतंत्रस्य भाषाटीका मनोरमा ॥
दोहा-शभु शिवा रघुपति सिया, बन्दौं पवनकुमार । कृपा करहु जन जान मोहिं, गुणागार सुखसार ॥
ब्रह्मा, शिव, कार्तिकेय, विष्णु, वरुण, यम, अग्नि, इन्द्र, कुबेर, चन्द्र, सूर्य्य, सरस्वती, सागर, चारोंयुग, पर्वत, वायु, पृथ्वी, वासुकि आदि सर्प, कपिलादि सिद्ध, नदी, अश्विनीकुमार, लक्ष्मी, दिति ( कश्यपपत्नी ), अदितिके पुत्र ( देवता ), चण्डिकाआदि मातायें, वेद ( ऋक्, यजु, साम, अथर्व ), तीर्थ ( पुण्यक्षेत्र काशी आदि ), यज्ञ ( दर्श पौर्णमासादि ), गण ( प्रमथादि ), वसु ( आठ देव ), मुनि ( व्यासादि ), ग्रह ( सूर्यादि ), नित्य ( हमारी ) रक्षा करें । स्रग्धरा छन्द है ॥ १ ॥
मनवे वाचस्पतये शुक्राय पराशराय ससुताय । चाणक्याय च विदुषे नमोऽस्तु नयशास्त्रकर्तृभ्यः ॥२॥
स्वायम्भू मनु, वृहस्पति, शुक्र, सपुत्र ( व्याससहित ) पराशर, पण्डित चाणक्य और नीतिशास्त्रके बनानेवालोके निमित्त नमस्कार है ॥ २ ॥