भारतकोश
पञ्चतन्त्रम् (संस्कृत मूल एवं भाषा टीका सहित)

पञ्चतन्त्रम् (संस्कृत मूल एवं भाषा टीका सहित)

Panchatantram with Sanskrit & Hindi Commentary

पं. विष्णु शर्मा / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished536 पृष्ठ

पृष्ठ 460, कुल 536 में से

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भाषाटीकासमेतम् । (४४५)

किसी स्थानमें उज्ज्वल नाम रथकार रहता था । वह अति दरिद्र होकर विचारने लगा । "अहो हमारे घरकी दरिद्रताको धिक्कार है । जो कि सम्पूर्ण मनुष्य अपने कर्ममे रत हुए स्थित हैं । हमारा कार्य्य तो इस स्थानमें नहीं चलता । जो कि सम्पूर्ण लोकोंके पुराने चार कोष्ठके घर हैं । मेरा नहीं है सो क्या मेरे रथकार होनेसे प्रयोजन है" । ऐसा विचार कर देशसे चलागया । जभी कुछ दूर वनमें पहुंचा कि, सूर्य्यके अस्त समय अपने यूथसे भ्रष्ट हुई प्रसवपीडासे युक्त एक ऊटनीको देखा । वह उस बच्चेसे युक्त ऊटनीको लेकर अपने घरको चला, घरमें प्राप्त हो रस्सी ले उससे उस ऊटनीको बांधता हुआ । तीव्र (तीक्ष्ण) कुल्हाडीको लेकर उसके निमित्त पत्ते लेनेको पर्वतके एक स्थानमें गया। वहा नूतन कोमल बहुतसे पत्ते छेदनकर शिरपर धारणकर उसके आगे डाल देता हुआ । वहभी उनको शनैः २ भक्षण करने लगी तब रातदिन पल्लव भक्षणके प्रभावसे पुष्ट शरीर ऊटनी होगई । और दासेरकभी महान् ऊट होगया। तबतक नित्यही दूधको ग्रहणकर अपने कुटुम्बकी पालना करता । तब रथकारने प्यारके कारण ऊटके बच्चेकी गर्दनमें बडा घंटा बांध दिया । पीछे रथकार विचारने लगा । "अहो ! और दुष्कृत कर्मोंसे क्या है जबसे मैं इस ऊटके पालन करने लगा उससे इस कुटुम्बकी कुशल हुई सो अब और व्यापारसे क्या है" ऐसा विचार घर आनकर अपनी प्रियासे बोला-"भद्रे ! यह व्यापार अच्छा है । जो तेरी सम्मति हो तौ किसी धनीसे कुछ द्रव्य लाकर मैं ऊटके बच्चे ग्रहण करनेको गुर्जर देशमें जाऊगा । तबतक तू इन दोनोंकी यत्नसे रक्षा कर । जबतक मैं और ऊटनीको लाऊ "। तब वह गुर्जर देशमें जाय ऊटनीको ग्रहणकर अपने घर आया । बहुत कहनेसे क्या है उसने वह किया जो उसके बहुतसे ऊटके बच्चे होगये । तब उसने बडा ऊटोंका यूथ कर एक रक्षा पुरुष रक्खा । उस रक्षकको नौकरीमें प्रतिवर्ष एक ऊटका बच्चा देता । और प्रतिदिन दूधपानभी उसको निरूपण करदिया । इस प्रकार रथकार नित्यही ऊटनी ऊटके बच्चोंका व्यापार करता सुखसे स्थित था । और वे ऊटके बच्चे घरके उपवनमे भोजनको जाते । कोमल बेलें यथेच्छ भोजनकर बडे सरोवरमे पानी पीकर संध्यासमय मन्द २ लीलासे घरको आते । और वह पहला बच्चा मदके अधिक होनेसे पीछे आकर मिलता । तब उन बच्चोंने कहा-"अहो ! यह बच्चा वडा

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