भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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१०२. पराशरस्मृतिः [ दशमो- घर में सदैव पवित्र रहकर स्त्रियां नियमपूर्वक आचरण करें। जो गोघातक अपने गोवध को संसार की दृष्टि में छिपाने का प्रयास करता है ॥६०॥ स याति नरकं घोरं कालसूत्रमसंशयम् । विमुक्तो नरकात्तस्मात् मर्त्यलोके प्रजायते ॥६१॥ वह निश्चय ही घोर कालसूत्र नामक नरक में वास करता है। उस नरक से मुक्त होनेके बाद जब वह पुनः मृत्युलोक में आता है तब ॥ ६१ ॥ क्लीबो दुःखी च कुष्ठी च सप्तजन्मनि वै नरः । तस्मात् प्रकाशयेत् पापं स्वधर्मं सततं चरेत् ॥६२॥ वह प्राणी नपुंसक, दुखी और कोढ़ी होकर सात जन्म तक कष्ट भोगता रहता है। इसलिए अपने किये हुए पापों को गुप्त न रखकर उन्हें सब लोगों पर प्रकट करके सदैव धर्माचरण में तत्पर रहना चाहिए ॥६२॥ स्त्री-बाल-भृत्य-गो-विप्रेष्वतिकोपं विवर्जयेत् ॥६३१/२॥ इति पाराशरीये धर्मशास्त्रे गोरक्षणार्थे गोविपत्तिप्रायश्चित्त नाम नवमोऽध्यायः ॥ ९ ॥ स्त्री, बालक, सेवक, गौ और ब्राह्मण के ऊपर कभी भी अत्यन्त क्रोध नहीं करना चाहिए ॥ ६३१/२ ॥ इस प्रकार ‘शिवदत्ती’ हिन्दीटीका में पराशरप्रोक्त धर्मशास्त्र में नवाँ अध्याय समाप्त ॥ ९ ॥ ❀ १०. दशमोऽध्यायः चातुर्वर्ण्येषु सर्वेषु हितं वक्ष्यामि निष्कृतिम् । अगम्यागमने चैव १शुद्धौ चान्द्रायणं चरेत् ॥ १ ॥ १. ‘शुद्ध्यै’ इति ।