भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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ऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता १०९ सातवें दिन निर्जल उपवास करने का नाम ही कृच्छ्र-सान्तपन व्रत है ॥२९॥ जारेण जनयेद् गर्भं मृते त्यक्ते गते पतौ । तां त्यजेदपरे राष्ट्रे पतितां पापकारिणीम् ॥३०॥ जो स्त्री अपने पति के मरने, पति द्वारा त्यागे जाने और पति के विदेश गमन करने पर किसी पर-पुरुष द्वारा गर्भाधान कर ले तो उस पतिता नारी को किसी दूसरे राज्य में ले जाकर निर्वासित कर देना चाहिए ॥३०॥ ब्राह्मणो तु यदा गच्छेत् परपुंसा समन्विता । सा तु नष्टा विनिर्दिष्टा न तस्याऽऽगमनं पुनः ॥३१॥ यदि ब्राह्मण की पत्नी किसी पर-पुरुष के साथ चली जाय तो वह नष्टा कहलाती है, उसका पुनः आगमन नहीं होता ॥३१॥ कामान्मोहात्तु या गच्छेत् त्यक्त्वा बन्धून् सुतान् पतिम् । साऽपि नष्टा परे लोके मानुषेषु विशेषतः ॥३२॥ जो स्त्री अपने बन्धु, पुत्र और पति को छोड़कर काम या मोह के वशीभूत होकर किसी अन्य पुरुष के साथ चली जाय तो वह इहलोक तथा परलोक दोनों में नष्टा होती है ॥३२॥ मद-मोहगता नारी क्रोधाद् दण्डादिताडिता । अद्वितीया गता चैव पुनरागमनं भवेत् ॥३३॥ जो स्त्री मतवाली होकर या किसी प्रकार दण्डित होकर क्रोधवश कहीं अन्यत्र चली जाय तो उसका पुनरागमन हो सकता है ॥३३॥ दशमे तु दिने प्राप्ते प्रायश्चित्तं न विद्यते । दशाहं न त्यजेन्नारीं त्यजेन्नष्टश्रुतां तथा ॥३४॥ यदि ऐसी स्त्री को दस दिन तक लगातार बाहर ही रहना पड़े तो उसका प्रायश्चित्त नहीं होता। इसलिए स्त्री का दस दिनों तक परित्याग