पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 120, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ेंCC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri १०८ पाराशरस्मृतिः [ दशमो- यथा भूमिस्तथा नारी तस्मात्तां न तु दूषयेत् । बन्दिग्राहेण या भुक्ता हृत्वा बद्ध्वा बलाद् भयात् ॥२५॥ स्त्रियों को धरती के समान ही कहा गया है, इससे उनके दोषों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। जिस स्त्री के साथ बलपूर्वक उसे बाँधकर, दासी बनाकर या उसे भयभीत करके रमण किया गया हो ॥२५॥ कृत्वा सान्तपनं कृच्छ्रं शुद्ध्येत पाराशरोऽब्रवीत् । सकृद्भुक्ता तु या नारी नेच्छन्ती पापकर्मभिः ॥२६॥ तो ऐसी स्त्री सान्तपन कृच्छ्र व्रत के अनुष्ठान से दोषमुक्त हो जाती है। ऐसी बात पाराशर ने कही है। यदि किसी दुरात्मा ने स्त्री की अनिच्छा से केवल एक ही बार सम्भोग किया हो ॥२६॥ प्राजापत्येन शुद्ध्येत ऋतुप्रस्रवणेन च । पतत्यर्द्धं शरीरस्य यस्य भार्या सुरां पिवेत् ॥२७॥ तो वह स्त्री प्राजापत्य व्रत और ऋतुकाल में रजोस्राव होने से ही शुद्धता को प्राप्त हो जाती है। जिस मनुष्य की पत्नी मद्यपान कर ले, तो उस पुरुष के शरीर का आधा अंश दूषित और पतित हो जाता है ॥२७॥ पतिताद्र्धशरीरस्य निष्कृतिर्न विधीयते । गायत्रीं जपमानस्तु कृच्छ्रं सान्तपनं चरेत् ॥२८॥ इस प्रकार के पतितों की शुद्धि नहीं हो सकती। उसे गायत्री मन्त्र का जप और कृच्छ्र सान्तपन व्रत का अनुष्ठान करना उचित है ॥२८॥ गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकम् । एकरात्रोपवासश्च कृच्छ्रं सान्तपनं स्मृतम् ॥२९॥ एक दिन गोमूत्र, दूसरे दिने गोबर, तीसरे दिन गाय का दूध, चौथे दिन दही, पाँचवें दिन घी, छठे दिन कुशा का जल पीकर और Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal