पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४० पाराशरस्मृतिः [ द्वादशो- चान्द्रायणं यावकं च तुलापुरुष एव च । गवां चैवाऽनुगमनं सर्वपापप्रणाशनम् ॥७८॥ किसी पापी का पाप निर्दोष व्यक्ति को पानी पर तेल की बूँद पड़ने के समान ही लग जाता है। चान्द्रायण, यावक, तुलापुरुष और गायों के पीछे-पीछे अनुसरण करने से सभी प्रकार के पापों का शमन हो जाता है ॥७८॥ एतत् पाराशरं शास्त्रं श्लोकानां शतपञ्चकम् । द्विनवत्या समायुक्तं धर्मशास्त्रस्य संग्रहः॥७९॥ यह महर्षि पाराशर रचित पाँच सौ बानवे श्लोकों का धर्मशास्त्र संग्रह है ॥७९॥ यथाऽध्ययनकर्माणि धर्मशास्त्रमिदं तथा । अध्येतव्यं प्रयत्नेन नियतं स्वर्गकामिना ॥८०॥ इति देवरिया-मण्डलान्तर्गत - 'मझौलाराज्य' निवासि-व्याकरणाचार्य- साहित्यवारिधि-पण्डितश्रीशिवदत्तमिश्रशास्त्रिसम्पादिते पाराशरीये धर्म- शास्त्रे सकलप्रायश्चित्तनिर्णयो नाम द्वादशोऽध्यायः समाप्तः ॥१२॥ जिस प्रकार वेदाध्ययन से पुण्य-लाभ होता है उसी प्रकार इस धर्मशास्त्र के पढ़ने से भी पुण्य प्राप्त होता है। अतः प्रत्येक स्वर्गाभिलाषी व्यक्ति के लिए इस शास्त्र का पठन-पाठन नियमपूर्वक करना अत्यन्त आवश्यक है ॥८०॥ इस प्रकार 'देवरिया'-मण्डलान्तर्गत 'मझौलीराज्य' (सम्प्रति वाराणसी) निवासि- पण्डित श्रीसन्तशरणमिश्रात्मज-पण्डित-श्रीशिवदत्तमिश्र-शास्त्रिकृत 'शिवदत्ती' भाषाटीका में पाराशरीय धर्मशास्त्र में सकल- प्रायश्चित्त निर्णय नामक बारहवाँ अध्याय समाप्त ॥१२॥ Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal