भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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४० पाराशरस्मृतिः [ चतुर्थो- दरिद्रं व्याधितं धूर्तं १ भर्त्तारं याऽवमन्यते । सा शुनी जायते मृत्वा सूकरी च पुनः पुनः ॥१६॥ जो स्त्री अपने दरिद्र, रोगी अथवा धूर्त्त पति का अपमान करती है, वह मरने के अनन्तर बारम्बार कुतिया या शूक़री होती है ॥ १६ ॥ पत्यौ जीवति या नारी उपोष्य व्रतमाचरेत् । आयुष्यं हरते भर्त्तुः सा नारी नरकं व्रजेत् ॥१७॥ जो स्त्री अपने पति के जीवित रहने प . ( उसको आज्ञा के बिना ) व्रत अथवा उपवास करती है वह अपने पति को अल्पायु बनाती है तथा मरकर स्वयं भी नरक में जाती है ॥ १७ ॥ अपृष्ट्वा चैव भर्त्तारं या नारी कुरुते व्रतम् । सर्वं तद्राक्षसान् गच्छेदित्येवं मनुरब्रवीत् ॥१८॥ मनु का तो मत है कि जो स्त्री अपने पति की अनुमति के बिना ही व्रत का आचरण करती है उसे उस व्रत का फल न मिलकर राक्षसों को प्राप्त होता है ॥१८॥ बान्धवानां सजातीनां दुर्वृत्तं कुरुते तु या । गर्भपातं च या कुर्यान्न तां सम्भाषयेत् क्वचित् ॥१९॥ जो स्त्री अपने कुटुम्ब तथा सजातियों को अपने दुराचरण से हानि पहुँचावे अथवा गर्भपात करे, ऐसी स्त्री से किसी काल में भी सम्भाषणादि न करे ॥१९॥ यत्पापं ब्रह्महत्यायां द्विगुणं गर्भपातने । प्रायश्चित्तं न तस्याः २स्यात्तस्यास्त्यागो विधीयते ॥२०॥ १. 'मूर्ख' इत्यपि पाठः । २. 'तस्याऽस्ति' इति ।