पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 57, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ेंऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ४५ जिस ब्राह्मण को भेड़िया, कुत्ता अथवा शृगाल आदि नीच जानवरों ने काट खाया हो, तो वह स्नान कर वेदमाता गायत्री का जप करे ॥ १ ॥ गवां शृङ्गोदकैः स्नानं महानद्योस्तु सङ्गमे । समुद्रदर्शनाद् वाऽपि शुना दष्टः शुचिर्भवेत् ॥ २ ॥ अब विशेष कहते हैं कि जिस ब्राह्मण को कुत्ते ने काट लिया हो वह गौ के शृङ्ग ( सींग ) के जल से स्नान करे अथवा समुद्रगामिनी दो महानदियों के संगम में स्नान करे या समुद्र का दर्शन करे तब उसकी शुद्धि होती है ॥ २ ॥ वेद-विद्या-व्रतस्नातः शुना दष्टो द्विजो यदि । स हिरण्योदकैः स्नात्वा घृतं प्राश्य विशुद्ध्यति ॥ ३ ॥ यदि किसी वेदज्ञ अथवा चतुर्दश-विद्यासम्पन्न अथवा उत्तम व्रत करनेवाले किसी ब्राह्मण को कुत्ते ने काट लिया हो, तो वह सोने को धोकर, उस पानी से स्नान करे, पश्चात् घी का भोजन करने से उसकी शुद्धि होती है ॥ ३ ॥ सत्रतस्तु शुना दष्टो यस्त्रिरात्रमुपावसेत् । घृतं कुशोदकं पीत्वा व्रतशेषं समापयेत् ॥ ४ ॥ व्रत की अवस्था में यदि किसी ब्राह्मण को कुत्ते ने काट लिया हो, तो वह तीन दिन-रात उपवास करे ओर फिर घी तथा कुशा का जल पीकर व्रत के शेष दिनों को पूरा करे ॥ ४ ॥ अव्रतः सत्रती वाऽपि शुना दष्टो भवेद् द्विजः । प्रणिपत्य भवेत् पूतो विप्रैश्चक्षुर्निरीक्षितः ॥ ५ ॥ ब्राह्मण चाहे किसी व्रत में हो अथवा न हो, यदि उसे कुत्ते ने काट लिया हो तो वह ब्राह्मणों को दण्डवत् करे । यदि ब्राह्मण उसे आँखभर देख लें तो वह शुद्ध हो जाता है ॥ ५ ॥