पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 58, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ पाराशरस्मृतिः [ पञ्चमो- शुना घ्राताऽवलीढस्य नखैर्विलिखितस्य च । अद्भिः प्रक्षालनाच्छुद्धिर्ग्निना चोपचूलनम् ॥ ६ ॥ जिस वस्तु को कुत्ते ने सूंघ अथवा चाट लिया हो अथवा अपने नाखूनों से खसोट लिया हो, उस वस्तु की शुद्धि जल से धोकर आग में तपा देने से हो जाती है ॥ ६ ॥ शुना तु ब्राह्मणी दष्टा जम्बुकेन वृकेण वा । उदितं १सोमनक्षत्रं दृष्ट्वा सद्यः शुचिर्भवेत् ॥ ७ ॥ जिस ब्राह्मणी को कुत्ते, गीदड़ अथवा भेड़िये ने काट लिया हो वह उसी समय उदय होनेवाले चन्द्रमा सहित ताराओं को देखकर शुद्ध हो जाती है ॥ ७ ॥ कृष्णपक्षे यदा सोमो न दृश्येत कदाचन । यां दिशं व्रजते सोमस्तां दिशं वाऽवलोकयेत् ॥ ८ ॥ यदि कदाचित् कृष्णपक्ष के होने से चन्द्रमा दिखाई न दें तो जिस दिशा में चन्द्रमा जानेवाले हों उस दिशा को ही देख ले। चन्द्रमा की दिशा गति इस प्रकार है—मेष२, सिंह और धनु राशि में पूर्व दिशा में, वृष, कन्या, मकर राशि में दक्षिण दिशा में, मिथुन, तुला, कुम्भ में पश्चिम दिशा में, कर्क, वृश्चिक तथा मीन में उत्तर दिशा में चन्द्रमा रहते हैं ॥ ८ ॥ असद्ब्राह्मणके ग्रामे शुना दष्टो द्विजोत्तमः । वृषं प्रदक्षिणीकृत्य सद्यः स्नात्वा शुचिर्भवेत् ॥ ९ ॥ १. 'ग्रह-' इति । २. मेषे च सिंहे धन पूर्वभागे वृषे च कन्या मकरे तु याम्याम् । मिथुने तुले कुम्भसु पश्चिमायां कर्काऽलि-मीने दिशि चोत्तरस्याम् ॥