परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)
Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary
महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'? No, look at the conjunct: ह् + र = ह्र. Below it is nothing, so ह्र. Then द: जिह्रदि'ति. Wait! What root has aṅga 'जिह्रद्'? Wait! 'ह्राद्' (ह्रादेः) -> णिच् -> ह्रादि -> चङ् -> जिह्राद् -> ह्रस्व -> जिह्रद्! 'मा भवान् अजीह्रदत्' / 'मा भवानुजिह्रदत्' (with un-? No, 'मा भवानजीह्रदत्' or 'मा भवान् अजिह्रदत्')! Wait, look at the text in L24: "'मा भवानजीह्रदि'ति"?! Wait! Look at the first letters of the quote: ' म ा भ व ा न [ु or ज?] ... Wait! Look closely at the letter after 'भवान्': It is 'अ' or 'उ'? It's 'अ'! Wait, look: ' म ा भ व ा न जी ह्र दि ' ति ! Wait, is it "अजीह्रदत्" or "अजीह्रदिति"? Look: ' म ा भ व ा न (भवान्) then: अ (a) जी (jee) ह्र (hra) दि (di) ' त ि (ti) Wait, why "दि'ति"? Wait, in