पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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ॐ
श्रीपरमात्मने नमः
पातञ्जलयोगदर्शन
साधारणहिंदीभाषाटीकासहित
समाधिपाद—१
अथ योगानुशासनम् ॥१॥
‘परम्परागत योगविषयक शास्त्र आरम्भ करते हैं।’
**व्याख्या—**इस सूत्रमें योगविषयक शास्त्र आरम्भ करनेकी प्रतिज्ञा करके योगसाधनकी कर्तव्यता सूचित की गयी है ॥१॥
**सम्बन्ध—**इस प्रकार योगशास्त्रके वर्णनकी प्रतिज्ञा करके अब योगके सामान्य लक्षण बतलाते हैं—
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः ॥२॥
‘चित्तकी वृत्तियोंका निरोध (सर्वथा रुक जाना) योग है।’
**व्याख्या—**इस ग्रन्थमें प्रधानतासे चित्तकी वृत्तियोंके निरोधको ही ‘योग’ नामसे कहा गया है ॥२॥
पा० यो० द० १—