भारतकोश
पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

Patanjali Yoga Darshan

महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा

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श्रीपरमात्मने नमः

पातञ्जलयोगदर्शन

साधारणहिंदीभाषाटीकासहित

समाधिपाद—१

अथ योगानुशासनम् ॥१॥

‘परम्परागत योगविषयक शास्त्र आरम्भ करते हैं।’

**व्याख्या—**इस सूत्रमें योगविषयक शास्त्र आरम्भ करनेकी प्रतिज्ञा करके योगसाधनकी कर्तव्यता सूचित की गयी है ॥१॥

**सम्बन्ध—**इस प्रकार योगशास्त्रके वर्णनकी प्रतिज्ञा करके अब योगके सामान्य लक्षण बतलाते हैं—

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः ॥२॥

‘चित्तकी वृत्तियोंका निरोध (सर्वथा रुक जाना) योग है।’

**व्याख्या—**इस ग्रन्थमें प्रधानतासे चित्तकी वृत्तियोंके निरोधको ही ‘योग’ नामसे कहा गया है ॥२॥

पा० यो० द० १—