पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
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| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| [ उ ] | |||
| उदानजयाज्जलपङ्ककण्टकादिष्वसङ्ग उत्क्रान्तिश्च | ३ | ३९ | १०९ |
| [ ऋ ] | |||
| ऋतम्भरा तत्र प्रज्ञा ... | १ | ४८ | ३७ |
| [ ए ] | |||
| एकसमये चोभयानवधारणम् ... | ४ | २० | १३९ |
| एतयैव सविचारा निर्विचारा च सूक्ष्मविषया व्याख्याता | १ | ४४ | ३५ |
| एतेन भूतेन्द्रियेषु धर्मलक्षणावस्थापरिणामा व्याख्याताः | ३ | १३ | ९० |
| [ क ] | |||
| कण्ठकूपे क्षुत्पिपासानिवृत्तिः ... | ३ | ३० | १०४ |
| कर्माशुक्लाकृष्णं योगिनस्त्रिविधमितरेषाम् ... | ४ | ७ | १३० |
| क्रमान्यत्वं परिणामान्यत्वे हेतुः ... | ३ | १५ | ९४ |
| कायरूपसंयमात्तद्ग्राह्यशक्तिस्तम्भे चक्षुःप्रकाशा-संप्रयोगेऽन्तर्धानम् ... | ३ | २१ | ९९ |
| कायाकाशयोः सम्बन्धसंयमाल्लघुतूलसमापत्तेश्चाकाशगमनम् ... | ३ | ४२ | ११२ |
| कायेन्द्रियसिद्धिरशुद्धिक्षयात्तपसः ... | २ | ४३ | ७४ |
| कूर्मनाड्यां स्थैर्यम् ... | ३ | ३१ | १०४ |
| कृतार्थं प्रति नष्टमप्यनष्टं तदन्यसाधारणत्वात् | २ | २२ | ५९ |
| क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेष ईश्वरः | १ | २४ | २० |
| क्लेशमूलः कर्माशयो दृष्टादृष्टजन्मवेदनीयः ... | २ | १२ | ४९ |
| क्षणतत्क्रमयोः संयमाद्विवेकजं ज्ञानम् ... | ३ | ५२ | १२८ |
| क्षणप्रतियोगी परिणामापरान्तनिर्ग्राह्यः क्रमः | ४ | ३३ | १४९ |