भारतकोश
पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

Patanjali Yoga Darshan

महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा

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ॐ श्रीपरमात्मने नमः

पातञ्जलयोगदर्शनके प्रधान विषयोंकी सूची

समाधिपाद १

सूत्रविषयपृष्ठ
१-४ग्रन्थके आरम्भकी प्रतिज्ञा, योगके लक्षण और उसकी आवश्यकताका प्रतिपादन... १-२
५-११चित्तकी वृत्तियोंके पाँच भेद और उनके लक्षण... २-९
१२-१६अभ्यास और वैराग्यका प्रकरण... ९-१३
१७-२२समाधिका विषय ...... १३-१९
२३-२९ईश्वर-प्रणिधान और उसके फलका कथन... १९-२३
३०-४०चित्तके विक्षेपोंका, उनके नाशका और मनकी स्थितिके लिये भिन्न-भिन्न उपायोंका वर्णन... २३-३०
४१-५१समाधिके फलसहित अवान्तर भेदोंका वर्णन... ३१-३९

साधनपाद २

सूत्रविषयपृष्ठ
१-२क्रियायोगके स्वरूप और फलका निरूपण... ४०-४२
३-९अविद्यादि पाँच क्लेशोंका वर्णन... ४२-४८
१०-१७क्लेशोंके नाशका उपाय और उसकी आवश्यकताका प्रतिपादन... ४८-५५
१८-२२दृश्य और द्रष्टाके स्वरूपका तथा दृश्यकी सार्थकताका कथन५६-५९
२३-२७प्रकृति-पुरुषके अविद्याकृत संयोगका स्वरूप और उसके नाशके उपायभूत अविचल विवेकज्ञानका निरूपण५९-६४
२८-५५विवेकज्ञानकी प्राप्तिके लिये अष्टाङ्गयोगके अनुष्ठानकी आवश्यकता, आठों अङ्गोंके नाम तथा उनमेंसे पाँच बाह्य अङ्गोंके लक्षण और उनके विभिन्न अवान्तर फलोंका वर्णन६४-८२