पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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विभूतिपाद ३
| सूत्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| १-३ | { धारणा, ध्यान और समाधि--इन तीनों अङ्गोंके स्वरूपका प्रतिपादन ... | ८३-८४ |
| ४-८ | निर्बीज समाधिके बहिरङ्ग साधनरूप संयमका निरूपण ... | ८४-८६ |
| ९-१२ | चित्तके परिणामोंका विषय ... | ८६-८९ |
| १३-१५ | प्रकृतिजनित समस्त पदार्थोंके परिणामका निरूपण ... | ९०-९५ |
| १६-४८ | फलसहित भिन्न-भिन्न संयमोंका वर्णन ... | ९६-११९ |
| ४९-५५ | { विवेकज्ञानका और उसके परम फलरूप कैवल्यका निरूपण ... | ११९-१२४ |
कैवल्यपाद ४
१-५ | { सिद्धियोंकी प्राप्तिके पाँच हेतुओंका तथा जात्यन्तर-परिणामका विषय ... | १२५-१२९ ६-७ | { ध्यानजनित परिणामकी संस्कारशून्यता (निराशयता) का प्रतिपादन और योगीके कर्मोंकी महिमा ... | १३०-१३१ ८-११ | साधारण मनुष्योंके कर्मफल-प्राप्तिके प्रकारका वर्णन ... | १३१-१३३ १२-२४ | अपने सिद्धान्तका युक्तिपूर्ण प्रतिपादन ... | १३४-१४३ २५-३४ | { विवेकज्ञानका विषय और धर्ममेघ समाधि तथा कैवल्य-अवस्थाका निरूपण ... | १४४-१५०