पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीपरमात्मने नमः ॥
निवेदन
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥
मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिम् ।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् ॥
योगदर्शन एक बड़ा ही महत्त्वपूर्ण और साधकोंके लिये परम उपयोगी शास्त्र है। इसमें अन्य दर्शनोंकी भाँति खण्डन-मण्डनके लिये युक्तिवादका अवलम्बन न करके सरलतापूर्वक बहुत ही कम शब्दोंमें अपने सिद्धान्तका निरूपण किया गया है। इस ग्रन्थपर अबतक संस्कृत, हिन्दी और अन्यान्य भाषाओंमें बहुत भाष्य और टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं। भोजवृत्ति और व्यासभाष्यके अनुवाद भी हिन्दी-भाषामें कई स्थानोंसे प्रकाशित हो चुके हैं। इसके सिवा 'पातञ्जलयोगप्रदीप' नामक ग्रन्थ स्वामी ओमानन्दजीका लिखा हुआ भी प्रकाशित हो चुका है; इसमें व्यासभाष्य और भोजवृत्तिके सिवा दूसरे-दूसरे योगविषयक शास्त्रोंके भी बहुत-से प्रमाण संग्रह करके एवं उपनिषद् और श्रीमद्भगवद्गीतादि सद्ग्रन्थोंके तथा दूसरे दर्शनोंके साथ भी समन्वय करके ग्रन्थको बहुत ही उपयोगी बनाया गया है। परन्तु ग्रन्थका विस्तार अधिक है और मूल्य अधिक होनेके कारण सर्वसाधारणको सुलभ भी नहीं है। इन सब कारणोंको विचारकर करीब दो वर्ष पहले पूज्यपाद भाईजी श्रीजयदयालजीकी आज्ञासे मैंने इसपर यह 'साधारण हिन्दी-