पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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पातञ्जलयोगदर्शन
वाल्मीकि-आश्रम
अहिंसाप्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैरत्यागः ॥ ( २ । ३५ )
खग मृग विपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं ॥
करि केहरि कपि कोल कुरंगा। बिगत बैर बिचरहिं सब संगा ॥