भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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१०४ फलदीपिका भौमांशके धातुरणप्रहारैर्महानसाद्भूमिवशात्सुवर्णात् । परोपतापाद्युधसाहसैर्वा म्लेच्छाश्रयात्सूचकचोरवृत्त्या ॥४॥ काव्यागमैर्लेखकलिप्युपायैर्ज्योतिर्गणज्ञानवशाद्बुधांशे । परार्थवेदाध्ययनाज्जपाच्च पुरोहितव्याजवशात्प्रवृत्तिः ॥ ५ ॥ जीवांशके भूसुरदेवतानां समाश्रयाद्भूमिपतिप्रसादात् । पुराणशास्त्रागमनीतिमार्गाद्धर्मोपदेशेन कुसीदवृत्त्या ॥ ६ ॥ स्त्रीसंश्रयाद्गोमहिषीगजार्थैस्तौर्यत्रिकैर्वा रजतैश्च गन्धैः । क्षीराद्यलङ्कारपटोपटाद्यैः शुक्रांशकेऽमात्यगुणैः कवित्वात् ॥७॥ शन्यंशके मूलफलैः श्रमेण प्रेष्यैः खलैर्नीचधनैः कुधान्यैः । भारोद्वहात्कुत्सितमार्गवृत्त्या शिल्पादिभिर्दारुमयैर्वधाद्यैः ॥ ८ ॥ ऊपर यह बताया गया है कि सूर्य, चन्द्र, लग्न से दशमेश के नवांश राशि स्वामी के पदार्थ और कार्यों से लाभ होता है। किस ग्रह के क्या-क्या पदार्थ और कार्य समझें यह नीचे बताया जाता है। सूर्य :—फल, फल वृक्ष, मन्त्र, जप, शठता (चालाकी, धोखा, शैतानी), जुआ, झूठ बोलना, कम्बल, ऊन, ऊनी वस्त्र, दवा, दवा के पदार्थ, धातु क्रिया, (विविध धातुओं का कार्य) किसी सम्मानित व्यक्ति की या राजा की (या सरकार की) नौकरी द्वारा । चन्द्रमाः—जल से उत्पन्न पदार्थ, (मोती, मूंगा, सिंघाड़ा) अथवा जल-पार देशों से आने-जाने वाले माल से) खेती से, गाय, भैंस, दूध, दही, घी आदि से, तीर्थाटन से, किसी स्त्री के आश्रय से, या कपड़े की खरीद-फरोख्त से ।