फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished684 पृष्ठ
पृष्ठ 109, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 109
१०८ फलदीपिका हों या स्वामी के अतिरिक्त अन्य ग्रह देखते हों तो अन्य देश में भाग्योदय होता है अर्थात् अपनी जन्म भूमि में भाग्योदय नहीं होता। विदेश में जीविका उपार्जन करता है। कुछ अन्य ज्योतिष ग्रन्थों में यह भी लिखा है कि भाग्येश चर राशि में हो तो विदेश में भाग्योदय यदि स्थिर राशि में हो तो स्वदेश में भाग्योदय और यदि द्विस्वभाव राशि में हो तो कभी स्वदेश में कभी परदेश में कार्य करने से धन प्राप्ति या भाग्योदय हो।