भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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छठा अध्याय : योग १२१ प्रौढ़ भाषण कहलाता है) भाषण करने वाला, राजसवृत्ति* का होता है। ऐसा व्यक्ति दीर्घायु हो। बहुत उसकी तीव्र बुद्धि हो, महान् यश प्राप्त करे और अपने स्वाभाविक तेज से ही ओरों को जीत ले । ।। १६ ।। क्वचित्क्वचिद्भाग्यपरिच्युतः सन् पुनः पुनः सर्वमुपैति भाग्यम्। लोकेऽप्रसिद्धोऽपरिहार्यमन्तः शल्यं प्रपन्नः शकटेऽतिःदुखी ॥१७॥ अब शकट योग का फल बताते हैं। शकट योग में उत्पन्न व्यक्ति अत्यन्त दुःखी होता है, इसके हृदय मे ऐसा दुःख का काँटा लगा हुआ होता है कि उससे छुटकारा पाना कठिन है। ऐसा व्यक्ति प्रसिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता और साधारण जीवन व्यतीत करेगा। कभी-कभी ऐसे व्यक्ति का सितारा बहुत तेज हो जाता है और कभी सितारा बिलकुल गिर जाता है। इसी कारण कहा है कि कभी-कभी भाग्य से हीन हो जाय और फिर भाग्य को प्राप्त हो। साथ ही कुण्डली में चन्द्रमा से छठे बृहस्पति होने के कारण शकट योग होना चाहिये था परन्तु केन्द्र में चन्द्र होने से नहीं हुआ। माननीय स्वर्गवासी पंडित जवाहरलाल जी की जन्म कुण्डली। प्रयाग में १४ नवम्बर सन् १८८९ को सूर्योदय से ४१ घड़ी ३८ पल पर जन्म हुआ।

जन्म कुण्डली विवरण:

  • लग्न (प्रथम भाव - ४ कर्क): चं. (चन्द्र)

  • द्वितीय भाव (५ सिंह): श. (शनि)

  • तृतीय भाव (६ कन्या): मं. (मंगल)

  • चतुर्थ भाव (७ तुला): शु. बु. (शुक्र, बुध)

  • पंचम भाव (८ वृश्चिक): सू. (सूर्य)

  • षष्ठ भाव (९ धनु): बृ. के. ह. (बृहस्पति, केतु, हर्षल)

  • सप्तम भाव (१० मकर): रिक्त

  • अष्टम भाव (११ कुम्भ): रिक्त

  • नवम भाव (१२ मीन): रिक्त

  • दशम भाव (१ मेष): रिक्त

  • एकादश भाव (२ वृष): रिक्त

  • द्वादश भाव (३ मिथुन): रा. (राहु)

  • रजोगुण प्रधान कार्य, शान, शौकत आदि।