भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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छठा अध्याय : योग १४९ योग में उत्पन्न मनुष्य को गो सम्पत्ति (गाय, बैल आदि) धन-धान्य, आदि पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होते हैं। इसका मकान बहुत सुन्दर होता है। बन्धुओं की बहुतायत रहती है। अर्थात् बन्धुओं से सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्त्री, रत्न, वस्त्र, भूषण आदि के साथ-साथ आदरणीय उत्तम स्थान प्राप्त होता है। ऐसे मनुष्य का सुख स्थिर होता है अर्थात् दीर्घ काल तक वह सुखी रहता है। उसे हाथी, घोड़े, पालकी आदि का पूर्ण सुख प्राप्त हो और राजा भी उसका सम्मान करे। ऐसे मनुष्य देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त अर्थात् धार्मिक कार्यों में प्रवृत्त रहते हैं और कुएँ खुदवाना, प्याऊ लगवाना आदि कार्य करते रहते हैं। संक्षेप में चतुर्थ सुख स्थान है इससे बन्धु, सुख, मकान, सवारी, जलकार्य, आदि जितनी बातों का विचार किया जाता है उन सबका सुख जातक को प्राप्त होता है। (५) यदि पंचम भाव में शुभ ग्रह हों या इसे देखते हों और पांचवें घर का मालिक अस्त न हो और अपनी राशि का या अपनी उच्चराशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में बैठा हो तो छत्र योग होता है। ऐसा जातक संसार के सब सौभाग्यों से युक्त, सन्तान सुख वाला, धनी, यशस्वी बुद्धिमान्, उत्तम भाषण करने वाला, तीक्ष्ण बुद्धि, जिसको बहुत स्फूर्ति हो (जिसके विचार में उत्तम बुद्धि की नवीन बातें जागृत हों) राजा का मन्त्री होता है। ऐसे व्यक्ति को राजा या सरकार से सम्मान प्राप्त होता है। संक्षेप में पंचम भाव और पंचम भावेश के सुधर जाने से पंचम भाव सम्बन्धी सब सुख प्राप्त होता है। (६) यदि छठे भाव का स्वामी अस्त न होकर स्वराशि या उच्चराशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में बैठा हो और छठा भाव शुभ ग्रह युत या शुभग्रहों से वीक्षित हो तो अस्त्र योग होता है। साधारणतः छठा स्थान दुःस्थान या निकृष्ट स्थान समझा जाता है किन्तु छठे का स्वामी छठे में हो तो इसे खराब नही कहेंगे क्योंकि वह स्वगृही हुआ। प्रायः ज्योतिषी कहा करते हैं कि छठे ग्रह में पाप ग्रह का होना अच्छा है 'षष्ठे पापाः वित्तलाभं प्रकुर्युः' उनके कथन का आधार यह होता है कि छठा