भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 20

॥ ॐ ॥ फलदीपिका प्रथम अध्याय राशि भेद शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ सन्दर्शनं वितनुते पितृदेवनॄणां मासाब्दवासरदलैरथ ऊर्ध्वगं यत् । सव्यं क्वचित्क्वचिदुपैत्यपसव्यमेकं ज्योतिः परं दिशतु वस्त्वमितां श्रियं नः ॥ १ ॥ वाग्देवीं कुलदेवतां मम गुरून् कालत्रयज्ञानदान् सूर्यादींश्च नवग्रहान् गणपतिं भक्त्या प्रणम्येश्वरम् । संक्षिप्यात्रपराशरादिकथितान् मन्त्रेश्वरो दैवविद् वक्ष्येऽहं फलदीपिकां सुविमलां ज्योतिर्विदां प्रीतये ॥२॥ मंगलाचरण--शुक्ल (श्वेत या उज्ज्वल) अम्बर (वस्त्र या आकाश) धारण करने वाले, चन्द्रमा के वर्ण (कान्ति) वाले, प्रसन्न वदन चतुर्भुज देव (श्री भगवान्) का सब विघ्नों की शान्ति के लिये ध्यान करें। वह परम ज्योति (भगवान् सूर्यनारायण) जो ऊपर आकाश में देवताओं को आधे वर्ष (छः मास) तक, पितरों को आधे मास (एक पखवाड़े) तक और मनुष्यों को आधे दिन रात (१२ घंटे) तक एक साथ दर्शन देते हैं, जो कभी बायीं ओर चलते हैं (अर्थात् जिनकी गति कभी उत्तरायण होती है) और जो कभी दाहिनी ओर चलते हैं (अर्थात् जिनकी 7718