फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२० फलदीपिका जनाधीशस्थाने सजलविपिने धाम्नि विचरत् कुलाले कीलाले वसतिरुदिता मेषभवनात् ॥ ५ ॥ मेष आदि १२ राशियों के रहने के स्थान क्रमशः बताते हैं (१) जंगल, (२) जलपूर्ण खेत, (३) शयन (सोने) का कमरा, (४) जलपूर्ण दरार, (५) पर्वत, (६) जल और अन्न से पूर्ण भूमि, (७) वैश्य का घर, (८) छिद्र, (९) जनाधीश (राजा या अधिकारी का स्थान, (१०) जलपूर्ण जंगल, (११) कुम्हारों की जगह, (१२) जल । जन्मकुंडली या प्रश्न में जिस राशि से निर्णय किया जावे—उस राशि के उपर्युक्त वर्णित स्थान से फलादेश में सहायता लेनी चाहिये ॥ ५ ॥ भौमः शुक्रबुधेन्दुसूर्यशशिजाः शुक्रारजीवार्कजाः मन्दौ देवगुरुः क्रमेण कथिता मेषादिराशीश्वराः । सूर्यादुच्चगृहाः क्रियो वृषमृगस्त्रीकर्कमोनास्तुला दिक्त्र्यंशैर्मनुयुक्तितिथीषुभनखांशैस्तेऽस्तनीचाः क्रमात् ॥६॥ मेष और वृश्चिक इन दो राशियों का स्वामी मंगल होता है, वृष और तुला का शुक्र, मिथुन और कन्या का बुध, धनु और मीन का वृहस्पति, मकर और कुंभ राशियों का शनि । सिंह का सूर्य तथा कर्क का चन्द्रमा स्वामी है । अब नीचे के चक्र में किस ग्रह की कौन-सी उच्च राशि है और उस समस्त उच्च राशि में भी, किस अंश पर परम उच्च होता है यह बताया जाता है । इसी प्रकार ग्रहों की नीच राशि तथा उस नीच राशि में भी परम नीच अंश बताया जाता है । | ग्रह | उच्च राशि | परमोच्च अंश | नीच राशि | परम नीच अंश | | सूर्य | मेष | १० | तुला | १० | | चन्द्र | वृष | ३ | वृश्चिक | ३ | | मंगल | मकर | २८ | कर्क | २८ |