फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ फलदापका ग्रह राशि मूलत्रिकोण अपनीराशि बुध कन्या १५°-२०° २०°-३०° स्वराशि वृहस्पति धनु ०-१०° शेष स्वराशि शुक्र तुला ०-५° शेष स्वराशि शनि कुंभ ०°-२०° शेष स्वराशि अब राशियों को मनुष्य, कीट (कीड़ा) जल, तथा चतुष्पाद इन चार भागों में विभाजित करते हैं । मनुष्य चतुष्पाद कीट जलचर मिथुन मेष वृश्चिक कर्क कन्या वृष मकर (उत्तरार्द्ध) तुला मीन धनु (पूर्वार्ध) सिंह धनु (उत्तरार्द्ध) कुंभ मकर (पूर्वार्द्ध) गोकर्क्यश्व्यजनक्रभान्यथ नृयुङ्मीनौ परे राशय- स्ते पृष्ठोभयकोदयाः समिथुनः पृष्ठोदयाश्चैन्दवाः । सौराः शेषगृहाः क्रमेण कथिता रात्रिद्युसंज्ञाः क्रमा- दूर्ध्वाधःसमवक्रभानि तु पुनस्तीक्ष्णांशुमुक्ताद् गृहात् ॥८॥ अब कौन-सी राशि अपने आगे की ओर से उदय होती है, कौन-सी पीछे की ओर से और कौन-सी दोनों ओर से यह बताते हैं । मेष पृष्ठोदय कर्क पृष्ठोदय वृष पृष्ठोदय सिंह शीर्षोदय *मिथुन उभयोदय कन्या शीर्षोदय शीर्षोदय—सिर या आगे की ओर से उदय होने वाली । *१. बृहज्जातक के मतानुसार मिथुन शीर्षोदय है ।