भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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प्रथम अध्याय : राशि भेद २३ तुला शीर्षोदय मकर पृष्ठोदय वृश्चिक शीर्षोदय कुंभ शीर्षोदय धनु पृष्ठोदय मीन उभयोदय बहुत से विचारों में शीर्षोदय राशियां उत्तम मानी गई हैं; पृष्ठोदय क्रूर। शीर्षोदय राशि में स्थित ग्रह प्रारंभ में ही अपना फल दिखाता है। पृष्ठोदय में स्थित अंत में । उभयोदय में स्थित मध्य में । अब राशियों को (१) दिन में बली तथा (२) रात्रि में बली इन भागों में बांटते हैं।* दिवा बली—५, ६, ७, ८, ११, १२ रात्रि बली—१, २, ३, ४, ९, १० दिवा बली राशियों पर सूर्य का विशेष अधिकार है । रात्रि बली राशियों पर चन्द्रमा का । सूर्य जिस राशि को पार कर चुका है उससे गिनना प्रारंभ कीजिये— इनकी क्रमशः ऊर्ध्व, अधः सम, वक्र, यह संज्ञा है। उदाहरण के लिये सूर्य कन्या को पारकर तुला में आया तो कन्या से सिंह तक क्रमशः गिनिये। ऊर्ध्व, अधः, सम, वक्र, ऊर्ध्व, अधः सम, वक्र, ऊर्ध्व, अधः सम, वक्र । यह भिन्न-भिन्न राशियों की क्रमशः संज्ञा हुई ।। ८ ।। मेषादाह चरं स्थिराख्यमुभयं द्वारं बहिर्गर्भभं धातुर्मूलमितीह जीव उदितं क्रूरं च सौम्यं विदुः । मेषाद्याः कथितास्त्रिकोणसहिताः प्रागादिनाथाः क्रमा- दोजर्क्षं समभं पुमांश्च युवतिर्वामाङ्गमस्तादिकम् ॥ ९ ॥ पृष्ठोदय—पीछे की ओर से उदय होने वाली । उभयोदय—दोनों ओर से उदय होने वाली । *५ का अर्थ सिंह, ६ का कन्या इस प्रकार समझना चाहिये ।