फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
पृष्ठ 266, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ेंम यहाँ पुस्तक में दिए गए पृष्ठ का पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यन्तरण (transcription) प्रस्तुत कर रहे हैं:
चौदहवां अध्याय रोगनिर्णय रोगस्य चिन्तामपि रोगभावस्थितैर्ग्रहैर्वा व्ययमृत्युसंस्थैः । रोगेश्वरेणापि तदन्वितैर्वा द्वित्र्यादिसम्वादवशाद्वदन्तु ॥१॥ इस अध्याय में रोग, मृत्यु, पूर्व जन्म और भविष्य जन्म के विषय में बताया गया है। १. रोग के विषय में नीचे लिखे हुए ग्रहों से विचार करना चाहिये :— (क) जो ग्रह छठे घर में हों (ख) जो ग्रह अष्टम में हों (ग) जो ग्रह बारहवें घर में हों (घ) छठे घर के मालिक से (ङ) जो ग्रह छठे घर के मालिक के साथ हों। इस प्रकार इन ग्रहों के विचार से, दो तीन प्रकार से जब एक ही रोग निर्दिष्ट मालूम पड़े तब वह रोग होगा यह नतीजा निकालना चाहिये ॥ १ ॥ पित्तोष्णज्वरतापदेहतपनापस्मारहृत्क्रोडज- व्याधीन्वक्ति रविर्हृ'गार्त्यरिभयं त्वग्दोष