फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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सोलहवाँ अध्याय : द्वादश भावफल ३२१ चतुर्थेश बलवान् हो । भावेश के बलवान् होने से ही कार्य सिद्धि होती है। यदि भावेश दुर्बल है तो लग्नेश भावेश का योग होने पर भी कार्य सिद्धि नहीं होगी । दशा, अन्तर्दशा का भी विचार कर लेना चाहिये । जैसे ऊपर लग्न कुण्डली और लग्नेश से विचार बताया गया है उसी प्रकार चन्द्र कुण्डली (चन्द्रमा जिस राशि में हो उसे लग्न मानकर) विचार करना चाहिये । ॥३५॥