भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 326, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 326

सत्रहवाँ अध्याय : निर्याणप्रकरण ३२५ और नवांश में हों उन राशि नवांश पर या उनसे नवम, पंचम जब गोचरवश बृहस्पति आता है तब जातक की मृत्यु होती है । राहु की राशि, अंश, कला में से मंगल की राशि, अंश, कला घटाइये, जो शेष बचे उसको कहिये "ग" । "ग" जिस राशि और नवांश में है उस स्थान पर या उससे नवम-पंचम जब गोचरवश बृहस्पति आता है तब जातक के भाई की मृत्यु हो सकती है । ।६।। भानोः कण्टकवर्जितस्य भवनांशे वा त्रिकोणे गुरौ तातो नश्यति कण्टकोनगुलिकक्षांशत्रिकोणे शनौ । अर्कोनेन्दुगृहांशकोणगगुरौ चन्द्रोनमन्दात्मज- क्षेत्रेऽशेऽप्यथवा त्रिकोणगृहगे मन्दे जनन्या मृति ॥७॥, सूर्य की राशि, अंश, कला से यमकंटक की राशि, अंश कला घटाइये । जो शेष बचे उसे कहिये "क" । "क" जिस राशि और नवांश में है उस पर या उससे नवमपंचम गोचरवश बृहस्पति आता है तब जातक के पिता की मृत्यु हो सकती है । यमकंटक की राशि, अंश, कला में से मान्दि (गुलिक) की राशि, अंश, कला घटाइये, जो शेष बचे उसे कहिये "ख" । "ख" जिस राशि और नवांश में है उस पर या उससे नवमपंचम पर जब गोचरवश शनि आवे तब जातक के पिता की मृत्यु हो सकती है । सूर्य-स्पष्ट में से चन्द्र स्पष्ट घटाइये, जो शेष बचे उसे कहिये 'ग' । "ग" जिस राशि और नवांश में हो उस पर या उससे नवम पंचम जब गोचरवश बृहस्पति आवे तब जातक की माता की मृत्यु हो सकती है । चन्द्र-स्पष्ट में से मान्दि-स्पष्ट घटाइये, जो शेष बचे उसको कहिये "घ" । "घ" जिस राशि और नवांश में है उस पर या उससे नवम