भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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३३४ फलदीपिका यह देखिये कि जन्मकुण्डली में शुक्र किस राशि में है । इस राशि से जब गोचरवश ६ठे, ७वें या १२वें सूर्य हो तब मृत्यु होगी । ऐसा तो प्रति वर्ष तीन बार होता है इसलिये जैसा पहले बता चुके हैं जब अन्य बातों से पूर्ण मारक का योग आता है तभी यह विचार करना चाहिये कि मृत्यु कब होगी । ॥२७॥ तिष्ठन्त्यष्टमरिःफषष्ठपतयो रन्ध्रत्रिभागेश्वरो मान्दिर्यद्भवनेषु तेष्वपि गृहेष्वार्कीज्यसूर्येन्दवः । सर्वे चारवशात्प्रयान्ति हि यदा मृत्युस्तदा स्यान्नृणां तेषामंशवशाद्वदन्तु निधनं तत्तत्त्रिकोणेऽपि वा ॥२८॥ यह देखिये कि निम्नलिखित कुण्डली में किन राशियों में हैं:— (१) अष्टमेश (२) व्ययेश (३) षष्ठेश (४) अष्टम भाव मध्य जिस द्रेष्काण में है उसका स्वामी (५) मान्दि। जब गोचर वश शनि, बृहस्पति, सूर्य और चन्द्र उपर्युक्त राशियों में जा रहे हो तो जातक की मृत्यु हो सकती है अथवा उपर्युक्त जिन नवांशों में हो उन नवांशों में या उनसे नवम पंचम जब शनि, गुरु, सूर्य, चन्द्र गोचर- वश जावें तो मृत्यु हो सकती है । ॥२८॥