भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 337

३३६ फलदीपिका सद्विद्यो धनदारवान् बहुगुणः शुक्रेण युक्ते गुरौ ज्ञेयः श्मश्रुकरोऽसितेन घटकृज्जातोऽन्नकारोऽपि वा ॥४॥ असितसितसमागमेऽल्पचक्षु- र्युवतिसमाश्रयसम्प्रवृद्धवित्तः । भवति च लिखिपुस्तकचित्रवेत्ता कथितफलैः परतो विकल्पनीयाः ॥५॥ (i) यदि जन्म के समय सूर्य और चन्द्रमा एक राशि में हों तो जातक यंत्र और पत्थर के काम में कुशल होता है; सूर्य और मंगल एक साथ हों तो पाप करता है; सूर्य और बुध एक राशि में हों तो निपुण, बुद्धिमान्, कीर्तिवान् और सुखी हो । सूर्य बृहस्पति एक राशि में हों तो क्रूर हो और अन्य लोगों के कार्य में लगा रहे; सूर्य और शुक्र एक साथ हों तो रंग अर्थात् नाचना, गाना, सिनेमा, नाटक आदि से या शस्त्रों द्वारा धनोपार्जन करे; सूर्य शनि एक साथ हों तो धातु (लोहा इत्यादि) के कामों में अथवा बर्तनों के कार्य में कुशल हो ॥१॥ (ii) यदि चन्द्र-मंगल एक साथ हों तो आसव, घड़े दुकानदारी भरत के बर्तन (जो दो धातुओं को मिलाकर बनाया जाता है) आदि का कार्य करे । मातृ सुख के लिये यह योग अच्छा नहीं है । यदि माता जीवित रहेगी तो सम्भवतः बालक उसका आज्ञाकारी न हो । यदि चन्द्र-बुध साथ हों तो जातक मीठे और नम्र वचन बोलने वाला, अर्थ निपुण (धन के कार्य में निपुण अथवा किसी वाक्य या गणित का अर्थ लगाने में निपुण) सौभाग्यवान् और कीर्तिवान् हो । यदि चन्द्रमा और बृहस्पति एक साथ हों तो विक्रमशाली, अपने कुल में मुख्य और बहुत धनी हो किन्तु ऐसा व्यक्ति अस्थिर मति होता है अर्थात् मुस्तकिल मिजाज नहीं होता । यदि चन्द्रमा और शुक्र एक साथ हों तो वस्त्र- क्रिया (कपड़े के कारबार) में कुशल हो । यदि चन्द्रमा और शनि