भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 338

अठारहवां अध्याय : द्विग्रहयोग ३३७ एक साथ हों तो ऐसी स्त्री का पुत्र हो जिसने द्वितीय बार विवाह किया हो । हमारे विचार से यह योग हिन्दू समाज की उन जातियों पर घटित नहीं होगा जिनमें पुनर्विवाह की प्रथा नहीं है । ॥ २ ॥ (iii) यदि मंगल और बुध एक-साथ हों तो मूल (जड़ वाले पदार्थ—जड़ी बूटी, पौधे, वृक्ष, वृक्ष की छाल आदि), तेल, घी, चिकने पदार्थ, दवा आदि के व्यापार से लाभ होता हैं और जातक बाहु से युद्ध करने वाला भी होता है। यदि मंगल और बृहस्पति एक साथ हों तो किसी नगरी का अध्यक्ष हो या राजा हो या धनवान् ब्राह्मण हो । यदि मंगल और शुक्र एक साथ हों तो गोप (गौओं का मालिक), पहलवान, दूसरे की स्त्रियों में रत, जुआ खेलने वाला और चतुर होता है। यदि मंगल और शनि साथ हों तो दुःखी निन्दित, झूठी प्रतिज्ञा वाला अर्थात् झूठ बोलने वाला होता है। ॥३॥ (iv) यदि किसी जन्मकुण्डली में बुध और बृहस्पति एक साथ हो तो जातक नाटक में काम करने वाला (स्टेज पर) गाने का शौकीन और नृत्यकला जानने वाला होता है। यदि बुध और शुक्र साथ हों तो जातक वाग्मी (अच्छा बोलने वाला) ज़मीन का स्वामी, गण (चुनी हुई संस्थाओं) का अध्यक्ष होता है। यदि बुध और शनि एक साथ हो तो मायापटु (बहुत चालाक) और लम्पट हो । (v) यदि बृहस्पति और शुक्र एक साथ हों तो जातक उत्तम विद्या वाला, धनवान्, स्त्रियों से युक्त और बहुत गुणों से सम्पन्न होता है। यदि बृहस्पति और शनि एक साथ हों तो जातक नाई का, कुम्हार का या भोजन बनाने वाले का कार्य करे ऐसा मन्त्रेश्वर महाराज का मत है। हमारे विचार से बृहस्पति ज्ञान का प्रतीक है और शनि वैराग्य का इस कारण बृहस्पति व शनि एक साथ हों तो जातक अन्तर्मुखी वृत्ति वाला होता है। ॥ ४ ॥ (vi) यदि शुक्र और शनि एक-साथ हों तो जातक की दृष्टि में कुछ कमी हो । ऐसे व्यक्ति की सम्पत्ति, वृद्धि किसी युवती का