फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअठारहवां अध्याय : द्विग्रहयोग ३३९ धूर्तो हयाङ्गे स्वजनं जनेशं नरौघमाश्रित्य शठः सदम्भः । भूपो नरेशः क्षितिपो विपश्चि- द्धनी दरिद्रो मकरे हिमांशौ ॥१०॥ कुम्भेऽन्यदारनिरतः क्षितिपो नरेन्द्रो वेश्यापतिर्नृपवरो हिमगौ नृमान्यः । अन्त्येऽघकृत्पटुमतिर्नृपतिश्च विद्वान् दोषैकहग्दुरितकृच्च कुजादिदृष्टे ॥११॥ (i) यदि चन्द्रमा मेष में हो और उस पर सूर्य, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र या शनि की दृष्टि हो तो क्रमशः निम्नलिखित फलें होते हैं (१) गरीब (२) राजा हो (३) विद्वान् (४) राजा (५) राजा के समान (६) चोर । (ii) यदि चन्द्रमा वृषभ में हो और सूर्य, मंगल, बुध, बृहस्पति शुक्र या शनि से देखा जाय तो क्रमशः निम्नलिखित फल होता है । (१) नौकर (२) धनहीन (३) चोर (४) लोकमान्य (५) राजा और (६) धनी । ॥६॥ (iii) मदि चन्द्रमा मिथुन का हो और सूर्य, मंगल बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि से दृष्ट हो तो क्रमशः निम्नलिखित फल होता है (१) निर्धन (२) लोहे का काम करने वाला (३) राजा (४) विद्वान् (५) साहसी (६) तानेबाने या कपड़े का काम करने वाला । (iv) यदि चन्द्रमा कर्क में हो और सूर्य, मंगल, बुध, बृहस्पति, शक्र, शनि की उस पर दृष्टि हो तो क्रमशः निम्नलिखित फल होता है । (१) नेत्र-रोगी (२) योद्धा (३) विद्वान् (४) बुद्धिमान्