फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
पृष्ठ 343, कुल 684 में से
संदर्भ में पढ़ें३४२ फलदीपिका स्वांशेऽल्पगात्रधनलुब्धतपस्विमुख्यः स्त्रीप्रेष्यकृत्यनिरतश्च निरीक्ष्यमाणे ॥१३॥ सक्रोधो नरपतिसंमतो निधींशः सिंहांशे प्रभुरसुतोऽर्तिहिंस्रकर्मा । जीवांशे प्रथितबलो रणोपदेष्टा हास्यज्ञः सचिवनिकामवृद्धशीलः ॥१४॥ अल्पापत्यो दुःखितः सत्यपि स्वे मानासक्तः कर्मणि स्वेऽनुरक्तः । दुष्टस्त्रीष्टः कोपनश्चार्किभागे चन्द्रे भानौ तद्वदिन्द्रादिदृष्टे ॥१५॥ (i) यदि जन्म के समय चन्द्रमा मंगल के नवांश में हो (मेष या वृश्चिक नवांश) और सूर्य आदि किसी ग्रह से देखा जाता हो तो निम्नलिखित फल होता है । (१) सूर्य से रक्षा करने वाला (२) मं० से वध में रुचि रखने वाला (३) बु० से युद्ध में कुशल (४) बृ० से राजा (५) शु० से धनवान् (६) श० से कलह करने वाला । (ii) यदि चन्द्रमा वृषभ या तुला नवांश में हो और किन्हीं ग्रहों से दृष्ट हो तो निम्नलिखित फल होता है (१) सू० से मूर्ख (२) मं० से दूसरे की स्त्रियों में रत (३) बु० से उत्तम कवि (४)