भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 344

अठारहवां अध्याय : द्विग्रहयोग ३४३ पर काम करने वाला अर्थात् नाटक-सिनेमा आदि के कार्यों से सम्बन्धित (२) मं० से चोर (३) बु० से कवि (४) बृ० से मंत्री (५) शु० से गान-विद्या जानने वाला (६) श० से शिल्प निपुण । (iv) यदि चन्द्रमा कर्क नवांश में हो और किसी ग्रह से दृष्ट हो तो निम्नलिखित फल होता है । (१) सू० से छोटे शरीर वाला (२) मं० से लोभी (३) बु० से तपस्वी (४) बृ० से मुख्य अर्थात् श्रेष्ठ पद को प्राप्त (५) शु० से किसी स्त्री की मातहती में काम करने वाला (६) श० से अपने कार्य में लगा हुआ । ॥१३॥ (v) यदि चन्द्रमा सिंह नवांश में हो तो विविध ग्रहों से दृष्ट होने का फल यह है । (१) सू० से क्रोधी (२) मं० से राजा का कृपापात्र (३) बु० से खज़ाने का स्वामी अर्थात् धनी (४) बृ० से उच्चपदाधिकारी (५) शु० से पुत्रहीन (६) श० से क्रूर कर्म करने वाला हिंसक । (vi) यदि चन्द्रमा धनु या मीन नवांश में हो तो विविध ग्रहों से दृष्ट होने का फल निम्नलिखित होता है (१) सू० से जिसके बल की बहुत ख्याति हो (२) रणोपदेष्टा अर्थात् रण के लिये या सैनिकों को आदेश देने वाला (३) बु० से हास्य रस कुशल (४) बृ० से मंत्री (५) शु० से कामवासना रहित (६) श० से वृद्धों की तरह स्वभाव वाला । ॥१४॥ (vii) यदि चन्द्रमा मकर या कुंभ नवांश में हो तो विविध ग्रहों से दृष्ट होने का निम्नलिखित फल होता है (१) सू० से थोड़ी सन्तान (२) मं० से दुःखी (३) बु० से अभिमानी (क) बृ० से अपने कर्म में अनुरक्त (५) शु० से दुष्ट स्त्री का प्यारा (६) श० से क्रोधी । नोट—जैसे चन्द्रमा के विविध नवांशों में होने से और विविध