फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउन्नीसवां अध्याय : दशाफल ३७५ ७. यदि सूर्य और मंगल दशम में हों तो जातक धनी होता है किन्तु बृहस्पति की दशा मारक होती है । ८. यदि बुध और शुक्र १२वें भाव में हों तो शुक्र दशा में राजयोग होता है । ९. यदि चन्द्रमा और बृहस्पति लग्न में हों तो जातक भाग्यवान् और प्रसिद्ध हो; यह विशेष राज योग है । १०. यदि कर्क राशि का चन्द्रमा लग्न में हो और सप्तम में मकर का मंगल हो तो राज योग होता है । ११. कर्क का चन्द्रमा लग्न में और चतुर्थ में तुला राशि का शनि हो तो राज योग है । १२. कर्क लग्न हो, लग्न में चन्द्रमा और दशम में मेष का सूर्य हो तो राज योगकारक है । १३. यदि बुध और वृहस्पति ग्यारहवें हों, शनि राहु, पंचम में हों तो राहु की महादशा में गंगा स्नान आदि शुभ फल होते हैं । सिंह लग्न अब नीचे सिंह लग्न वाली जन्म कुंडलियों के योग दिये जाते हैं । १. यदि सिंह लग्न हो और सूर्य, मंगल और बुध एक साथ बैठे हों तो जातक बहुत धनी होता है । यहाँ लग्नेश, द्वितीयेश, लग्नेश लाभेश को युति से धनयोग हुआ और सिंह लग्न वाले जातक को मंगल केन्द्र और त्रिकोण का मालिक होने के कारण योग कारक हुआ । इस कारण सूर्य, मंगल, बुध के योग को *कर्क लग्न के जितने योग दिये हैं—उनमें प्रत्येक जगह यह नहीं लिखा है कि यदि कर्क लग्न हो—परन्तु कर्क लग्न सम्बन्धी यह योग हैं ऐसा समझना चाहिये ।