भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 408

बीसवाँ अध्याय : अन्तर्दशाफल ४०७ दशेशस्य तुङ्गे सुहृद्भे दशेशात् त्रिषट्कर्मलाभत्रिकोणास्तभेषु । यदा चारगत्या समायाति चन्द्रः शुभं संविधत्तेऽन्यथा चेदरिष्टम् ॥३६॥ अब यह बताते हैं कि दशानाथ से किन-किन स्थानों पर जब चन्द्रमा गोचरवश आता है तब शुभ फल करता है । (क) दशानाथ की उच्च राशि, (ख) दशानाथ के मित्रों की राशि, (ग) दशानाथ से तृतीय, पाँचवे, छठे सातवे, नवें, दसवें, और ग्यारहवें । चन्द्रमा एक राशि में केवल सवा दो दिन रहता है । मान लीजिये आपको यह विचारना है कि दशानाथ के दृष्टिकोण से आज का चन्द्रमा कुछ शुभफल दिखायेगा क्या ? तो यह देख लीजिये कि क्या चन्द्रमा गोचर, वश उपर्युक्त किन्हीं राशियों में है । यदि गोचर वश चन्द्रमा अन्य राशि में हो तो उस काल में महादशानाथ का शुभ फल प्राप्त नहीं होगा ॥ ३६ ॥ पाकप्रभुर्गोचरतः स्वनीचं मौढ्यं यदायाति विपक्षभं वा । कष्टं विदध्यात्स्वगृहं स्वतुङ्गं वक्रं गतः सौख्यफलं तदानीम् ॥३७॥ जिस ग्रह की दशा या अन्तर्दशा जा रही हो वह गोचरवश यदि अपनी नीच राशि में या शत्रु राशि में जा रहा हो या सूर्य के समीप होने के कारण अस्त हो जावे तो ऐसी स्थिति में वह ग्रह कष्ट देगा । प्रायः यही बात ऊपर के ३५वें श्लोक में भी बतायी गयी है । अन्तर केवल यह है कि ऊपर ३५वें श्लोक में यह कहा है कि यदि "वह दशानाथ जन्म के समय भी बलहीन हो" किन्तु