भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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बीसवाँ अध्याय : अन्तर्दशाफल ४२७ ३. यदि दूसरे घर में सूर्य या मंगल हो तो जातक की वाणी प्रतिकूल हो । अर्थात् दूसरे की बात काटे । ४. चन्द्रमा दूसरे घर में हो तो जातक बहुत बोलता है । ५. दूसरे घर में बुध हो तो जानक युक्तियुक्त वाणी बोलेगा अर्थात् उसका भाषण चातुर्यपूर्ण होगा । ६. जिस जातक की जन्म कुण्डली में राहु दूसरे घर में होता है, उसकी वाणी में दीनता होती है । तीसरे भाव का विचार १. भाई बहन का विचार तीसरे घर के स्वामी, भ्रातृ कारक मंगल या मंगल के साथ बैठे हुये ग्रहों से करना चाहिए । २. यदि सूर्य, मंगल और तीसरे घर का स्वामी तीसरे में हो तो जातक साहसी और धीर होता है । ३. राहु, केतु तीसरे में हों तो जातक साहसी हो । ४. यदि तीसरे बुध हो तो मनुष्य धैर्यहीन हो । ५. यदि तृतीय भाव कमजोर हो लेकिन उसको बृहस्पति या मंगल देखते हों तो जातक के भाई होंगे । ६. बृहस्पति ग्यारहवें हो तो बड़े भाई से दुःख होता है ।* ७. यदि ग्यारहवें मंगल हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो बड़े भाई न होंगे । ८. तीसरे गृह का स्वामी छठे या आठवें हो तो भाइयों की समय से पहले मृत्यु हो अर्थात् भाई अल्पायु हों ।

  • बड़े भाई से अनबन या खटपट हो या बड़ा भाई जातक की कोई हानि करे या बड़ा भाई अल्पायु हो—यह सब ज्येष्ठ भ्रातृ- जनित दुःख कहलाता है ।