भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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४९० फलदीपिका जिसका भरणी के प्रथम चरण में जन्म हो उसको (i) वृश्चिक- मंगल (ii) तुला-शुक्र (iii) कन्या-बुध (iv) कर्क-चन्द्र (v) सिंह- सूर्य (vi) मिथुन-बुध (vii) वृषभ-शुक्र (viii) मेष-मंगल (ix) मीन- बृहस्पति यह नौ दशायें होती हैं । जिसका भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्म हो उसको (i) कुंभ-शनि (ii) मकर-शनि (iii) धनु-बृहस्पति (iv) मेष-मंगल (v) वृषभ-शुक्र (vi) मिथुन-बुध (vii) कर्क-चन्द्र (viii) सिंह-रवि (ix) कन्या-बुध यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्म हो उसे (i) तुला- शुक्र (ii) वृश्चिक-मंगल (iii) धनु-बृहस्पति (iv) मकर-शनि (v) कुंभ-शनि (vi) मीन-बृहस्पति (vii) वृश्चिक-मंगल (viii) तुला-शुक्र (ix) कन्या-बुध यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका भरणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्म हो उसको (i) कर्क चन्द्र (ii) सिंह-रवि (iii) मिथुन-बुध (iv) वृष-शुक्र (v) मेष-मंगल (vi) मीन-बृहस्पति (vii) कुंभ-शनि (viii) मकर-शनि और (ix) धनु बृहस्पति यह नौ दशाएँ होती हैं ॥६॥ वाक्यान्येतान्यश्वियाम्यर्क्षयोर्या- न्यश्विन्याद्यान्यग्निभस्यापसव्ये । सव्येऽजेन्द्रोर्वक्ष्यमाणेषु वाक्ये- ष्ठ्विन्दोर्वाक्यान्येव रौद्रस्य भूयः ॥७॥ अश्विनी और भरणी के पृथक-पृथक चरणों में जन्म होने से जो दशाएँ होती हैं—यह ऊपर के श्लोकों में बताया गया है । जो क्रम अश्विनी के पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे चरणों के लिये बताया गया है वह क्रमशः कृत्तिका के पहिले, दूसरे, तीसरे और चौथे चरणों के