फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबाईसवां अध्याय : मिश्रदशा ४८९ पौरं गावो मित सन्दिग्धं नक्षत्रेन्दुः स तु भूशूलम् । रूपेत्रक्षन्निधयोरङ्गे वाणौ चस्थं दधि नक्षत्रम् ॥५॥ जिसका अश्विनी के प्रथम चरण में जन्म हो उसको (i) मेष-मंगल (ii) वृषभ-शुक्र (iii) मिथुन-बुध (iv) कर्क-चन्द्र (v) सिंह-सूर्य (vi) कन्या-बुध (vii) तुला-शुक्र (viii) वृश्चिक-मंगल (ix) धनु- बृहस्पति यह नौ दशाये होती हैं । जिसका अश्विनी के द्वितीय चरण में जन्म हो उसकी (i) मकर- शनि (ii) कुंभ-शनि (iii) मीन-बृहस्पति (iv) वृश्चिक-मंगल (v) तुला-शुक्र (vi) कन्या-बुध (vii) कर्क-चन्द्र (viii) सिंह-सूर्य (ix) मिथुन-बुध यह नौ दशायें होती हैं । जिसका अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्म हो उसको (i) वृष-शुक्र (ii) मेष-मंगल (iii) मीन-बृहस्पति (iv) कुंभ-शनि (v) मकर-शनि (vi) धनु-बृहस्पति (vii) मेष-मंगल (viii) वृषभ- शुक्र (ix) मिथुन-बुध यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका अश्विनी चतुर्थ चरण में जन्म हो उसको (i) कर्क-चन्द्र (ii) सिंह-सूर्य (iii) कन्या-बुध (iv) तुला-शुक्र (v) वृश्चिक-मंगल (vi) धनु-बृहस्पति (vii) मकर-शनि (viii) कुंभ-शनि (ix) मीन- बृहस्पति-यह नौ दशायें होती हैं । दासतवेशो गौरीपुत्रं क्षन्निधिकारो गोभूशेषम् । सौधिनक्षेत्रेहासन्तो भौमगुरुः पुत्राक्षोनाधिः ॥६॥