भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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४९२ फलदीपिका जिसका रोहिणी के चतुर्थ चरण में जन्म हो उसे (i) मीन- बृहस्पति (ii) मेष-मंगल (iii) वृषभ-शुक्र (iv) मिथुन-बुध (v) सिंह- रवि (vi) कर्क-चन्द्र (vii) कन्या-बुध (viii) तुला-शुक्र (ix) वृश्चिक- मंगल यह नौ दशाएँ होती हैं ॥८॥ ऋक्षनिधिर्दा सूचीशंभो गौरयधी नक्षत्रं पारम् । गोशिवतीर्थे दात्रीक्षन्नो धीहसितांशुभोगी रम्या ॥६॥ जिसका मृगशिर नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म हो उसे (i) मीन- बृहस्पति (ii) कुंभ-शनि (iii) मकर-शनि (iv) धनु-बृहस्पति (v) वृश्चिक-मंगल (vi) तुला-शुक्र (vii) कन्या-बुध (viii) सिंह-सूर्य (ix) कर्क-चन्द्र यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका मृगशिर नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्म हो उसे (i) मिथुन-बुध (ii) वृषभ-शुक्र (iii) मेष-मंगल (iv) धनु-बृहस्पति (v) मकर-शनि (vi) कुंभ-शनि (vii) मीन-बृहस्पति (viii) मेष- मंगल (ix) वृष-शुक्र यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका मृगशिर नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्म हो उसे (i) मिथुन-बुध (ii) सिंह-सूर्य (iii) कर्क-चन्द्र (iv) कन्या-बुध (v) तुला- शुक्र (vi) वृश्चिक-मंगल (vii) मीन-बृहस्पति (viii) कुंभ-शनि और (ix) मकर-शनि यह नौ दशाएँ होती हैं । जिसका मृगशिर नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्म हो उसको (i) धनु-बृहस्पति (ii) वृश्चिक-मंगल (iii) तुला-शुक्र (iv) कन्या- बुध (v) सिंह-सूर्य (vi) कर्क-चन्द्र (vii) मिथुन-बुध (viii) वृषभ- शुक्र और (ix) मेष-मंगल यह नौ दशाएँ होती हैं ।