भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 503, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 503

५०२ फलदीपिका कालचक्रदशाक्रम (सारिणी ख) अश्विनी आदि २७ नक्षत्र हैं। प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं। भिन्न-भिन्न चरण में उत्पन्न होने से दशाक्रम भिन्न-भिन्न होता है। किस नक्षत्र चरण में जन्म होने से दशाक्रम क्या होता है, यह नीचे दिया जा रहा है :— १. अश्विनी प्र. च. (०-०-० से ०-३-२०) मे. वृष. मि. कर्क, सिं. कन्या, तु. वृ. ध. २. द्वि. च. (०-३-२० से ०-६-४०) म० कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या, कर्क, सिं. मि. ३. तृ. च. (०-६-४० से ०-१०-०) वृष मे. मी. कुं. म. ध. मे. वृष मि० ४. च. च. (०-१०-० से ०-१३-२०) कर्क, सिं., कन्या, तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी. ५. भरणी प्र. च. (०-१३-२० से ०-१६-४०) वृश्चि. तु. कन्या कर्क, सिं. मि. वृ. मे. मी. ६. द्वि. च. (०-१६-४० से ०-२०-०) कुं. म. ध. मे. वृ. मि. कर्क स. कन्या ७. तृ. च. (०-२०-० से ०-२३-४०) तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या ८. च. च. (०-२३-२० से ०-२६-४०) कर्क, सिंह. मि. वृ. मे. मी. कुं. म. ध. मे. ७ वर्ष कर्क २१ वर्ष० | तु० १६ व० | म० ४ व० वृ १६ ,, सि ५ ,, | वृ० ७ ,, | कुं. ४ ,, मि. ९ ,, कन्या ९ ,, | ध. १० ,, | मी. १० ,,