भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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५१० फलदीपिका ९४. द्वि. च. (१०-१०-० से १०-१३-२०) मि. वृ. मे. ध. म. कुं. मी. मे. वृ. ९५. तृ. च. (१०-१३-२० से १०-१६-४०) मि. सिं. कर्क, कन्या तु. वृश्चि. मी. कुं. म. ९६. च. च. (१०-१६-४० से १०-२०-०) ध. वृश्चि. तु. कन्या सिं. कर्क मि. वृ. मे. ९७. पूर्वाभाद्र प्र. च. (१०-२०-० से १०-२३-२०) मे. वृ. मि. कर्क, सिं. कन्या. तु. वृश्चि. ध. ९८. द्वि. च. (१०-२३-२० से १०-२६-४०) म. कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या, कर्क सिं. मि. ९९. तृ. च. (१०-२६-४० से ११-०-०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध. मे. वृ. मि. १००. च. च. (११-०-० से ११-३-२०) कर्क, सिं, कन्या, तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी. १०१. उत्तराभाद्र प्र. च. (११-३-२० से ११-६-४०) वृश्चि. तु. कन्या, कर्क, सिं. मि. वृ. मे. मी. १०२. द्वि. च. (११-६-४० से ११-१०-०) कुं. म. ध. मे. वृ. मि. कर्क, सिं. कन्या। . १०३. तृ. च. (११-१०-० से ११-१३-२०) तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या १०४. च. च. (११-१३-२० से ११-१६-४०) कर्क, सिं. मि. वृ. मे. मी. कुं. म. ध. १०५. रेवती प्र. च. (११-१६-४० से ११-२०-०) मे. वृ. मि. कर्क. सिं. कन्या. तु. वृश्चि. ध.

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