भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 512, कुल 684 में से

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बाईसवां अध्याय : मिश्रदशा ५११ १०६. द्वि. च. (११-२०-० से ११-२३-२०) म. कुं. मी. वृश्चि. तु. कन्या, कर्क, सिं. मि. १०७. तृ. च. (११-२३-२० से ११-२६-४०) वृ. मे. मी. कुं. म. ध. मे. वृ. मि. १०८. च. च. (११-२६-४० से १२-०-०) कर्क, सिं. कन्या, तु. वृश्चि. ध. म. कुं. मी. किस नक्षत्र चरण में जन्म होने से कितने वर्ष की महादशा होती है यह ४९९-५०१ पृष्ठों पर बताया गया है। बिना उसके भी ऊपर के विवरण से पाठक जान सकते हैं कि किस नक्षत्र चरण में जन्म होने से कितने वर्ष की दशा हुई। उदाहरण के लिये किसी मनुष्य का जन्म रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ तो दशा मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु ७ + १६ + ९ + २१ + ५ + ९ + १६ + ७ + १० = १०० वर्ष की हुई। पहिले बताया जा चुका है कि मेष के ७ वर्ष, वृष के १६ वर्ष.... इत्यादि होते हैं। इसी कारण जिस राशि की दशा के जितने वर्ष बताये गये हैं वे राशियों के नीचे लिख कर जोड़ा तो कुल १०० वर्ष हुए। अब मान लीजिये जन्म के दिन (पहिला दिन या दूसरा दिन भी शामिल करके) रेवती का कुल नक्षत्र मान ५६ घड़ी है। तो रेवती का एक चरण (चौथाई) १४ घड़ी का हुआ इसमें से ७ घड़ी बीत चुका है ७ घड़ी बाकी है। तो भुक्त भोग्य कितनी दशा हुई ? इसमें दो मत हैं। (१) एक मत तो यह है कि रेवती नक्षत्र प्रथम चरण में सबसे पहिले मेष की दशा आती है। मेष की दशा—कुल ७ वर्ष हैं। प्रथम चरण का आधा व्यतीत हो चुका है इस कारण ३½ वर्ष बीत गये बाकी ३½ वर्ष मेष के भोग्य, उसके बाद १६ वर्ष वृष के योग्य, फिर मिथुन के ९ वर्ष

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